वॉशिंगटन: अमेरिका में H-1B वीजा पर लगाए गए 1 लाख डॉलर यानी कि करीब 95 लाख रुपये) की फीस को रद्द करने के कोर्ट के आदेश के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि ऐसे न्यायिक फैसले देश को 'बहुत भारी नुकसान' पहुंचा रहे हैं। न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में NBA फाइनल देखने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि संघीय अदालतें प्रशासन के लिए 'बहुत मुश्किलें खड़ी कर रही हैं।'
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अदालत ने फीस को अवैध बताया
जजों के फैसले की आलोचना करते हुए ट्रंप ने कहा, 'ये जज हमें बहुत परेशान कर रहे हैं, ये वाकई पागलपन है। वे हमारे देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं।' मामले में अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा पर लगाए गए 1 लाख डॉलर शुल्क को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि यह शुल्क बिना कांग्रेस की मंजूरी के लगाया गया था, इसलिए यह अवैध है। यह फैसला कैलिफोर्निया सहित 19 राज्यों द्वारा दायर चुनौती के बाद आया।
कोर्ट ने क्यों अवैध किया घोषित?
ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में एक प्रोक्लेमेशन के जरिए नए H-1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की फीस लागू की थी। अदालत ने इसे 'अवैध टैक्स' बताया, क्योंकि इसे अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की इजाजत नहीं मिली थी। इससे पहले वॉशिंगटन की एक अदालत ने भी इसी तरह के आदेश को सही माना था। अब व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि इस फैसले को अपील कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि H-1B कार्यक्रम का 'दशकों से दुरुपयोग हुआ है' और ट्रंप ने इसे सुधारने के लिए कदम उठाया है।
राजनीतिक समर्थन और विरोध
कोर्ट के इस फैसले पर अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने अदालत के फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि भारी फीस का असर ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों और स्कूलों पर पड़ेगा, जहां विदेशी एक्सपर्ट्स की जरूरत होती है। अलास्का की सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की ने कहा कि उनके राज्य के दूरदराज इलाकों के स्कूल H-1B वीजा पर शिक्षकों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पार्टी राजनीति से ऊपर है। कांग्रेसमैन माइक लॉयर ने भी कहा कि वे स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारियों को इस फीस से राहत देने के लिए द्विदलीय कानून पर काम कर रहे हैं।
विपक्ष ने प्रतिक्रिया में क्या कहा?
वहीं, डेमोक्रेटिक सांसद डॉन बेयर ने अदालत के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ को रोकता है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि यह फीस अमेरिका की कुशल प्रतिभा को देश में आने से रोकती है और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने इसे 'प्रतिभा पर हमला' बताया। न्यू जर्सी की अटॉर्नी जनरल जेनिफर डेवेनपोर्ट ने भी कहा कि अदालत ने साफ कर दिया है कि कार्यपालिका ने अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल किया।
कोर्ट के फैसले का विरोध भी जारी
कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया है। एरिजोना के सांसद एली क्रेन ने कहा कि अदालत के फैसले को नजरअंदाज कर कांग्रेस को कानून के जरिए सुधार करना चाहिए। उन्होंने 'End H-1B Visa Abuse Act of 2026' का समर्थन करने की बात कही। बता दें कि H-1B वीजा अमेरिका की गेस्ट वर्कर प्रणाली का अहम हिस्सा है। इसमें हर साल 65,000 सामान्य वीजा दिए जाते हैं, जबकि 20,000 अतिरिक्त वीजा अमेरिका से उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों के लिए होते हैं।
भारत पर क्या होगा इसका असर?
आंकड़ों के मुताबिक, करीब 7.30 लाख H-1B वीजा धारक अमेरिका में रहते हैं, जिनके साथ करीब 5.50 लाख आश्रित भी रहते हैं। यह वीजा खासतौर पर तकनीक, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में कुशल विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में काम करने का अवसर देता है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर हर साल H-1B वीजा के जरिए अमेरिका जाते हैं। अमेरिकी कंपनियां तकनीकी विशेषज्ञता के लिए भारतीय प्रतिभा पर काफी निर्भर रहती हैं।